Monday, September 21

भूमि अधिग्रहण पर किसानों को मिलेगा चार गुना मुआवजा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

किसानों की जमीन की सुरक्षा के लिए सरकार प्रतिबद्ध, कृषि को आय के नए साधनों से जोड़ने पर जोर

जबलपुर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार खेती और किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। उन्होंने किसानों से अपनी जमीन सुरक्षित रखने की अपील करते हुए कहा कि भूमि हमारी माता है और यही हमारे उदर-पोषण का आधार है।

मुख्यमंत्री मंगलवार को मंत्रालय से भोपाल की करोंद कृषि उपज मंडी परिसर में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शासकीय योजनाओं के लिए कृषि भूमि का अधिग्रहण किए जाने की स्थिति में किसानों को एक-दो नहीं, बल्कि चार गुना मुआवजा दिया जाएगा।

डॉ. यादव ने कहा कि किसानों के खेत सरकार के लिए देवस्थल के समान हैं और उनका एक-एक दाना प्रदेश के लिए प्रसाद के समान है। किसानों के पसीने की हर बूंद का सम्मान करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि बलराम कृषि महोत्सव किसानों की मेहनत, समर्पण और कृषि क्षेत्र में उनके योगदान को सम्मान देने का माध्यम है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के सभी जिलों में बलराम कृषि महोत्सव आयोजित किए जा रहे हैं। बीते 26 दिनों में यह प्रदेश का 14वां आयोजन है। उन्होंने कहा कि जल्द ही भोपाल मुख्यालय में भी एक बड़ा कृषि महोत्सव आयोजित किया जाएगा।

किसानों के लिए ‘कवच’ योजना

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से सरकार ने ‘कवच’ योजना शुरू की है। इसके माध्यम से सहकारी खातों की पुरानी गड़बड़ियों को दूर कर करीब 5 हजार किसानों को ऋण और विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाया गया है। योजना के तहत किसानों को बिना ब्याज ऋण तथा ऋण चुकाने के लिए 12 महीने का समय देने की व्यवस्था की गई है।

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश का किसान अपने परिश्रम से प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। सरकार किसानों की आय के साधन बढ़ाने, खेती की लागत घटाने तथा तकनीक और नवाचार के माध्यम से उत्पादन एवं आमदनी बढ़ाने पर विशेष जोर दे रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में सिंचाई क्षमता को 100 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने, उद्यानिकी का रकबा 30 लाख हेक्टेयर करने और 10 हजार नई सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने किसानों से फसल विविधीकरण अपनाने, उद्यानिकी और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा पशुपालन और मछली पालन से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि खेती को केवल अन्न उत्पादन तक सीमित न रखते हुए इसे प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग से जोड़कर किसानों की आय के नए रास्ते तैयार किए जा रहे हैं।

(सद्वार्ता)

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