Friday, October 9

6G की होड़ में 5G ग्राहक परेशान: रिचार्ज 5G का, अनुभव 2G से भी खराब?

Airtel, Jio और BSNL समेत संचार कंपनियां नेटवर्क अपग्रेड की दौड़ में, लेकिन ग्राहकों की शिकायत—पैसा 5G का लेने के बावजूद डेटा स्पीड, कॉल ड्रॉप और नेटवर्क कवरेज की समस्या जस की तस

नई दिल्ली | SDNA

देश में एक ओर दूरसंचार कंपनियां 5G से आगे 6G तकनीक की दिशा में बढ़ने और नेटवर्क को लगातार अपग्रेड करने की होड़ में दिखाई दे रही हैं, वहीं दूसरी ओर आम मोबाइल उपभोक्ता मौजूदा 4G और 5G सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

ग्राहकों की शिकायतों का एक बड़ा हिस्सा नेटवर्क कवरेज, इंटरनेट कनेक्टिविटी, डेटा स्पीड, कॉल ड्रॉप और अचानक नेटवर्क गायब होने जैसी समस्याओं से जुड़ा है। सवाल यह है कि जब उपभोक्ता 5G सेवा के लिए भुगतान कर रहा है, तो उसे कम से कम स्थिर और भरोसेमंद मोबाइल सेवा क्यों नहीं मिल पा रही?

5G के नाम पर भुगतान, लेकिन इंटरनेट में लगातार रुकावट

आज मोबाइल फोन केवल मनोरंजन का साधन नहीं रह गया है। बैंकिंग, UPI भुगतान, ऑनलाइन पढ़ाई, सरकारी सेवाएं, टिकट बुकिंग, नौकरी, व्यापार, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और यहां तक कि रोजमर्रा के जरूरी काम भी मोबाइल इंटरनेट पर निर्भर हो चुके हैं।

ऐसे में जब उपभोक्ता को रिचार्ज के बाद अपेक्षित इंटरनेट सेवा नहीं मिलती, तो समस्या केवल धीमे इंटरनेट तक सीमित नहीं रहती।

कई उपभोक्ता अपने अनुभव में बताते हैं कि नेटवर्क सिग्नल दिखाई देने के बावजूद इंटरनेट नहीं चलता, डेटा स्पीड अचानक गिर जाती है या कुछ स्थानों पर मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह अस्थिर हो जाता है।

कॉल ड्रॉप की समस्या भी बनी बड़ी परेशानी

इंटरनेट के साथ voice calling को लेकर भी उपभोक्ताओं की शिकायतें सामने आती रहती हैं।

कॉल लगने में समय लगना, बातचीत के बीच आवाज कटना, कॉल अचानक डिस्कनेक्ट होना और बार-बार दोबारा कॉल करना—ये समस्याएं मोबाइल उपभोक्ताओं के लिए लगातार परेशानी का कारण बन सकती हैं।

व्यापारिक बातचीत, बैंकिंग, नौकरी से संबंधित कॉल या किसी आपात स्थिति में ऐसी समस्या का प्रभाव और गंभीर हो सकता है।

6G की बात, लेकिन 5G की गुणवत्ता पर सवाल

दूरसंचार क्षेत्र में 6G को लेकर भविष्य की तकनीक, तेज स्पीड और बेहतर कनेक्टिविटी की चर्चा हो रही है। कंपनियां नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने की दिशा में निवेश कर रही हैं।

लेकिन उपभोक्ता का सवाल भविष्य की 6G तकनीक से पहले आज मिल रही 5G सेवा को लेकर है।

ग्राहकों का सवाल सीधा है—

“जब हम 5G के लिए भुगतान कर रहे हैं, तो हमें कम से कम ऐसी सेवा तो मिलनी चाहिए जो स्थिर, भरोसेमंद और उपयोग योग्य हो।”

कुछ उपभोक्ता तो अपने अनुभव के आधार पर यह तक कहते हैं कि कई जगहों पर 5G तो दूर, उन्हें 2G जैसी सीमित कनेक्टिविटी का अनुभव होता है।

हालांकि, यह उपभोक्ताओं का अनुभव और शिकायत है; किसी क्षेत्र की वास्तविक नेटवर्क गुणवत्ता का आकलन करने के लिए स्वतंत्र तकनीकी परीक्षण और नेटवर्क डेटा आवश्यक होगा।

Airtel, Jio और BSNL के सामने एक समान चुनौती

भारत में निजी और सरकारी दोनों प्रकार की दूरसंचार कंपनियां नेटवर्क विस्तार और आधुनिकीकरण पर जोर दे रही हैं। Airtel, Jio और BSNL जैसे प्रमुख सेवा प्रदाताओं के सामने चुनौती केवल ज्यादा ग्राहकों को जोड़ने की नहीं, बल्कि उन्हें लगातार बेहतर गुणवत्ता वाली सेवा उपलब्ध कराने की भी है।

उपभोक्ता केवल आकर्षक 5G विज्ञापन या हाई-स्पीड के दावों से संतुष्ट नहीं होगा। वह यह जानना चाहता है कि उसके इलाके में वास्तव में नेटवर्क कितना स्थिर है और भुगतान के बदले उसे किस स्तर की सेवा मिल रही है।

क्या सिर्फ नेटवर्क कवरेज दिखना पर्याप्त है?

मोबाइल स्क्रीन पर 4G या 5G का सिग्नल दिखाई देना और वास्तव में उपयोगी इंटरनेट सेवा मिलना दो अलग-अलग बातें हो सकती हैं।

किसी उपभोक्ता के लिए वास्तविक सेवा गुणवत्ता में कई चीजें शामिल हैं—

  • नेटवर्क कवरेज
  • डेटा स्पीड
  • नेटवर्क स्थिरता
  • कॉल कनेक्टिविटी
  • कॉल ड्रॉप की दर
  • इंटरनेट लेटेंसी
  • भीड़ वाले क्षेत्रों में नेटवर्क क्षमता
  • घर और कार्यालय के अंदर नेटवर्क उपलब्धता
  • शिकायतों के समाधान की गति

इसलिए उपभोक्ता का मूल्यांकन केवल मोबाइल स्क्रीन पर दिखाई देने वाले 5G आइकन से नहीं किया जा सकता।

TRAI की जिम्मेदारी पर भी उठते हैं सवाल

दूरसंचार सेवाओं की गुणवत्ता और उपभोक्ता हितों के संदर्भ में TRAI (Telecom Regulatory Authority of India) की भूमिका महत्वपूर्ण है।

उपभोक्ताओं की अपेक्षा है कि दूरसंचार कंपनियों द्वारा दी जा रही सेवाओं की गुणवत्ता, शिकायत निवारण और उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े निर्धारित मानकों की प्रभावी निगरानी हो।

यदि किसी क्षेत्र में लगातार नेटवर्क समस्या, कॉल ड्रॉप या डेटा सेवा में गंभीर कमी की शिकायतें आती हैं, तो उपभोक्ताओं के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि शिकायत का समाधान किस स्तर पर और कितनी समयसीमा में होगा।

उपभोक्ता को सिर्फ रिचार्ज नहीं, गुणवत्तापूर्ण सेवा भी चाहिए

आज मोबाइल सेवा एक आवश्यक सुविधा बन चुकी है। उपभोक्ता हर महीने रिचार्ज करता है और बदले में उम्मीद करता है कि उसे नियमित और उपयोगी नेटवर्क सेवा मिले।

ऐसे में “रिचार्ज महंगा है या सस्ता” से ज्यादा महत्वपूर्ण सवाल है—“रिचार्ज के बदले सेवा वास्तव में कितनी गुणवत्तापूर्ण मिल रही है?”

यदि ग्राहक लगातार नेटवर्क खोजता रहे, कॉल बार-बार कटती रहे और इंटरनेट जरूरी समय पर काम न करे, तो 5G या उससे आगे की तकनीक के बड़े-बड़े दावों का उपभोक्ता के दैनिक अनुभव में कितना लाभ पहुंच रहा है, यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है।

6G से पहले 5G को भरोसेमंद बनाने की जरूरत

तकनीकी विकास का उद्देश्य केवल नई पीढ़ी का नेटवर्क लॉन्च करना नहीं, बल्कि मौजूदा सेवाओं को भी लगातार बेहतर बनाना होना चाहिए।

6G की तैयारी निश्चित रूप से भविष्य की जरूरत हो सकती है, लेकिन करोड़ों मौजूदा मोबाइल उपभोक्ताओं के लिए आज की प्राथमिकता स्थिर नेटवर्क, बेहतर कॉलिंग और भरोसेमंद इंटरनेट सेवा है।

उपभोक्ताओं की शिकायतों और वास्तविक नेटवर्क प्रदर्शन के बीच यदि अंतर बना रहता है, तो यह दूरसंचार कंपनियों के साथ-साथ नियामक व्यवस्था के लिए भी विचार का विषय होना चाहिए।

उपभोक्ता का सवाल सीधा है

“जब भुगतान 5G का किया जा रहा है, तो सेवा कम से कम इतनी गुणवत्तापूर्ण क्यों नहीं हो कि ग्राहक को बार-बार नेटवर्क, डेटा और कॉल ड्रॉप की समस्या से न जूझना पड़े?”

6G की दौड़ में भारत भले ही आगे बढ़ रहा हो, लेकिन आम उपभोक्ता की अपेक्षा फिलहाल बहुत सरल है—मोबाइल उठाइए, कॉल लगाइए और इंटरनेट चलाइए… बिना नेटवर्क की चिंता किए।

(SDNA)

Leave a Reply